
उत्तराखंड में 15 साल पुरानी गाड़ियों पर सख्ती: 19 जनवरी 2026 से टोल प्लाजा पर ऑटो ई-चालान व्यवस्था लागू
19 जनवरी 2026 से प्रदेश में ई-डिटेक्शन प्रणाली पूरी तरह से लागू
रुद्रपुर। उत्तराखंड सरकार ने यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने और अवैध वाहनों पर नियंत्रण के लिए बड़ा कदम उठाया है। 19 जनवरी 2026 से प्रदेश में ई-डिटेक्शन प्रणाली पूरी तरह से लागू कर दी गई है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी मोहित कोठारी ने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत राज्य की सीमाओं पर स्थापित टोल प्लाजा पर प्रवेश करते ही वाहनों के दस्तावेजों की डिजिटल जांच की जाएगी। यदि किसी वाहन का परमिट, बीमा, फिटनेस या आरसी नवीनीकरण समय पर नहीं कराया गया है, तो सिस्टम स्वतः ई-चालान जारी कर देगा। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली खासतौर पर 15 वर्ष या उससे अधिक पुराने वाहनों की पहचान करने में सक्षम है। ऐसे वाहन जिनकी फिटनेस समाप्त हो चुकी है या जिनका रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण नहीं हुआ है, वे अब बिना जांच से बच नहीं पाएंगे। परिवहन विभाग के अनुसार, इस व्यवस्था से बिना परमिट और बिना बीमा चल रहे वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। उन्होंने बताया कि उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी ने जानकारी दी। 17 जनवरी को इस प्रणाली का मैनुअल ट्रायल किया गया था। एक दिन में 7 टोल प्लाजा से 49,060 वाहनों का डेटा प्राप्त हुआ, जिनमें से 1,569 वाहन ऐसे पाए गए जिनके परमिट या फिटनेस की वैधता समाप्त हो चुकी थी। वाहन डाटाबेस से मिलान के बाद ट्रायल सफल पाया गया, जिसके बाद 19 जनवरी से इसे ऑटो मोड में लागू कर दिया गया।प्रदेश में जिन 7 प्रमुख टोल प्लाजा को इस प्रणाली से जोड़ा गया है, उनमें बहादराबाद और भगवानपुर हरिद्वार, लच्छीवाला देहरादून, तथा जगतापुर पट्टी, बनुषी, नगला और देवरिया ऊधमसिंह नगर शामिल हैं। यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा। उप संभागीय परिवहन अधिकारी मोहित कोठारी ने बताया कि यह कार्रवाई 19 जनवरी से लागू हो गई है।


मुकेश गुप्ता,
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