सिडकुल चौक पर मनाया गया अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस,मजदूरों के संघर्षों और हक अधिकारों को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प
श्रमिक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले विभिन्न मजदूर संगठनों की आयोजित हुई सभा, श्रमिक नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस पर मोदी सरकार के नए लेबर कोड थोपे जाने पर कड़ा विरोध किया
रुद्रपुर। सिडकुल चौक पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले विभिन्न संगठनों के मजदूरों की आयोजित हुई। यहां पर मनाया मजदूर दिवस मनाया गया। इस दौरान मजदूरों के संघर्षों और हक अधिकारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। सभा में सीएसटीयू के महासचिव कॉमरेड मुकुल ने कहा कि आठ घंटे का कार्यदिवस पूँजीवादी व्यवस्था की कोई सभ्यतागत देन नहीं था। बल्कि यह लगातार संघर्षों, बड़े उथल-पुथल और हे मार्केट शहीदों (मई 1886) की सर्वोच्च कुर्बानी से हासिल किया गया अधिकार था। शिकागो के हे मार्केट जनसंहार और मज़दूर नेताओं को दी गई फाँसी ने अंतरराष्ट्रीय मज़दूर वर्ग के संघर्षों की ज़बरदस्त हौसला अफ़ज़ाई की। इसके परिणामस्वरूप 1889 तक आते-आते मई दिवस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मज़दूरों के गौरवशाली संघर्ष दिवस के रूप में स्थापित हो गया और दुनिया भर में मनाया जाने लगा। ऐक्टू के राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड केके बोरा ने कहा कि हम पहला ऐसा अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस मना रहे हैं जो 1 अप्रैल से मोदी सरकार के नए लेबर कोड थोपे जाने के बाद आया है। ये नए लेबर कोड भारत के विशाल मज़दूर वर्ग को एक कॉरपोरेट जंगलराज के हवाले कर रहे हैं। मालिकों की तानाशाही को राज्य का पूरा संरक्षण हासिल है. इन लेबर कोड्स के आने के बाद आठ घंटे का कार्यदिवस के सार्वभौमिक अधिकार खत्म कर दिया गया है। वक्ताओं ने कहा कि ट्रेड यूनियन बनाना पहले से कहीं ज़्यादा मुश्किल कर दिया गया है, और सामूहिक सौदेबाज़ी की ताकत को बुरी तरह कमज़ोर किया गया है। इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव कैलाश भट्ट ने कहा कि हर इंसानी सभ्यता आजादी से जीना चाहती है, लेकिन फासीवादी राज में मजदूर वर्ग को कॉरपोरेट–पूंजीपतियों की गुलामी की ओर धकेला जा रहा है। पिछले दिनों यूपी,हरियाणा, उत्तराखंड सिडकुल के कई कंपनियों के ठेका मजदूरों ने आवाज उठाई तो सरकार ने घबराकर नाममात्र ही सही दिखावे के लिए कुछ वेतन बढ़ाने की घोषणा की,उत्तराखंड में कई सालों बाद वेज बोर्ड गठित किया। सालों से लटकी परिवर्तनीय महंगाई भत्ते पर लगी रोक को भी हटा दिया गया। यह मजदूरों के संघर्ष का परिणाम है।मजदूर वर्ग को अपनी ताकत को पहचानकर अपने हक की लड़ाई के लिए आगे आना होगा। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट डीएस. मेहता ने कहा कि यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड की डबल इंजन की भाजपा सरकार फासीवादी मोदीराज के नक्शेकदम पर चलकर मजदूर आंदोलनों का दमन का रही है।
सरकार मज़दूरों के इनआंदोलनों को ‘देश-विरोधी साज़िश’ करार दे रही है. मज़दूरों की आवाज़ उठाने वाले कार्यकर्ताओं को फँसाने के लिए उन्हें ‘मास्टरमाइंड’ बताकर गिरफ़्तार किया जा रहा है और उनसे वकीलों तक को नहीं मिलने दिया जा रहा है। स्वास्थ्य जैसे सरकारी सेक्टरों को भी पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए बेच दे रही है। जिससे मजदूर वर्ग को इनसे मिलने वाली सुविधाओं में भी कटौती और महंगाई झेलनी पड़ रही है।

मई दिवस पर आयोजित सभा में यह पर यह प्रस्ताव लाए गए
मई दिवस की सभा में लेबर कोड्स रद्द कर पुराने श्रम कानूनों की बहाली करने,स्थाई प्रकृति व भारी मशीनों के कामों में ठेकेदारी प्रथा खत्म करने, आईएलओ के श्रम सम्मेलन के मानकों के अनुसार न्यूनतम वेतन 30000 करने, मजदूर नेता व मजदूरों का दमन बंद करने व उन पर लादे गए सभी मुकदमे रद्द करने, मजदूरों का प्रबंधन द्वारा तमाम तरह के शोषण पर रोक लगाए जाने की मांग करने का प्रस्ताव लिया गया।
सभा को भाकपा(माले) जिला सचिव ललित मटियाली, कार्लोस के शिवदेव सिंह,सीटू जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह, इंटक के जिलाध्यक्ष जनार्दन सिंह, एडवोकेट शंकर चक्रवर्ती, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की रविन्द्र कौर, मंत्री मेटलिक यूनियन के निरंजन लाल, कारोलिया लाइटिंग मजदूर संगठन के ठाकुर सिंह, इंट्रार्क मजदूर संगठन के सौरभ,बजाज ऑटो मजदूर संगठन के संदीप सिंह, पीडीपीआईडी के हरीश मौर्या, समाजसेवी सुब्रत विश्वास आदि ने संबोधित किया। सभा का संचालन श्रमिक संयुक्त मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी ने किया।

मुकेश गुप्ता,
संपादक – ‘ऊधम सिंह नगर टाइम्स’
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