राजा रुद्रचन्द अध्ययन केन्द्र का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता जीएसटी कमिश्नर उर्मिला पिंचा बोली पुस्तकें ज्ञान बढ़ाती हैं, हंमे विरासत को साथ लेकर कार्य करना होगा
रुद्रपुर। सरदार भगत
सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं देवभूमि विचार मंच के सहयोग से राजा रुद्रचन्द अध्ययन केन्द्र का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ किया गया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ बसुन्धरा उपाध्याय हिंदी विभाग ने बताया कि यह अध्ययन केन्द्र शोधार्थी एवं छात्र छात्राओं के के शैक्षणिक विकास में सहायक होगा।इसके माध्यम से हम सम समायिक विषयों पर प्रकाश डालेंगे।जिसमें कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य अवधेश नारायण सिंह ने की। कार्यक्रम प्रस्तावना डॉ शिल्पी अग्रवाल ने प्रस्तुत की।कार्यक्रम की मुख्य वक्ता उर्मिला पिंचा जीएसटी असिस्टेंट कमिश्नर ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान बढ़ाती हैं।उन्होंने कहा कि हंमे विरासत को साथ लेकर कार्य करना होगा।मुगलकाल और अंग्रेजी शासनकाल ने भारतीय ज्ञान व संस्कृति का नाश कर दिया। स्किल डेवलपमेंट भी
हमारी पुरातन ज्ञान प्रणाली में समाहित था।हमारी परम्परा हमारे देश समाज और प्रकृति से जुड़ी है।मौखिक परम्पराएं हमारे जीवन का हिस्सा हैं।भारतीय ज्ञान परम्परा को आगे बढ़ाने में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि हमारी सभ्यता में महिलाओं को पूजा जाता है।हम बो हैं जो पुस्तकों को जलाते नहीं पुस्तकों को नमन करते हैं और उनमें वर्णित सार को आत्मसात कर समाज को नई दिशा देते हैं।कार्यक्रम के अतिथि वक्ता प्रो.सतेंद्र राजपूत, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार ने शोधकार्य को बढ़ावा देने के सम्बंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।सरकार के द्वारा दी जाने वाली सहायता सम्बधी योजनाओं से अवगत कराया।उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा में शोध के बहुत से अवसर हैं।महाविद्यालय प्राचार्य ने बताया कि हमारी परम्पराओं का सरक्षण होना चाहिए।इसका दायित्व हमारा है और भारतीय ज्ञान परम्परा को लेकर महाविद्यालय भी आगामी समय कार्य करेगा।उनका कहना था कि जो सेवानिवृत्त हो जाते हैं उन्हें भी साथ लेकर हम अपनी इन परम्पराओं को बचा सकते हैं। भगवती प्रसाद राघव ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह एक वैचारिक आंदोलन का स्वरूप है।प्रवाह का अर्थ है आगे बढ़ना अर्थात ज्ञान को आगे बढ़ाना।उन्होनें कहा कि सत्संग का अर्थ है सज्जन समाज का एकजुट होना ,समाज के उत्थान के लिए अर्थात समाज के विकास के लिये हम सभी एक होकर कार्य करना ही पड़ेगा। जो संस्थायें कार्य कर रही हैं प्रज्ञा प्रवाह उनका सहयोग कर रही। उन्होंने बताया कि हमारी परम्परा में बचत जीवन का हिस्सा रही है। यहां तक कि छोटे बच्चों को भी परिवार गुल्लक लाकर देते हैं पर वही बचत उस परिवार के काम आती है।वर्तमान में चुनौती तो बहुत हैं वैश्विक चुनौतियों का हम सामना कैसे करें।आज लोक परम्परा को शिक्षण संस्थानों के माध्यम से फिरसे लोक तक ले जाना।कार्यक्रम में प्रो.दीपा वर्मा,प्रो. भरत राजपूत,प्रो शैलजा जोशी,प्रो.सर्बजीत यादव, प्रो. आशा राणा,प्रो मनोज पांडेय, प्रो राघवेंद्र मिश्रा, डॉ मुन्नी जोशी,डॉ कमला बोरा,डॉ गरिमा जायसवाल, अभिषेक गुप्ता,तरुण प्रजापति,सरबजीत कौर आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ प्रकाश जोशी ने किया।

मुकेश गुप्ता,
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