अंतरराष्ट्रीय बाजार में माल बेचने के नाम पर ठगी करने वाली फर्जी एजेंसी के खिलाफ पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, कोर्ट के आदेश पुलिस की कार्रवाई
कूट रचित दस्तावेजों के सहारे एक स्थानीय खाद्य उत्पादक कंपनी से लाखों रुपये डकारने का आरोप, द्वारिका फूड प्रोडक्ट्स कंपनी के डीजीएम एक्सपोर्ट से हुई ठगी
पीड़ित को कानपुर पहुंचने पर जानकारी मिली कि मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह पहले ही धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में गिरफ्रतार हो चुका है
रूद्रपुर। अंतरराष्ट्रीय बाजार में माल बेचने के नाम पर ठगी करने वाली फर्जी एजेंसी के खिलाफ न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। एरा स्काई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और एक्सपोर्टर्स वर्ल्ड संस्था पर आरोप है कि उन्होंने कूट रचित दस्तावेजों के सहारे एक स्थानीय खाद्य उत्पादक कंपनी से लाखों रुपये डकार लिए। पुलिस ने कंपनी के निदेशकों सहित आधा दर्जन लोगों के विरुद्ध षडड्ढंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है। शिमला पिस्तौर स्थित द्वारिका फूड प्रोडक्ट्स कंपनी के डीजीएम एक्सपोर्ट अमित पुरवार से रितेश शुक्ला नामक व्यक्ति ने संपर्क कर खुद को एक्सपोर्टर्स वर्ल्ड एजेंसी का प्रतिनिधि बताया। उसने दावा किया कि उनकी एजेंसी अंतरराष्ट्रीय लीड दिलाती है। कारोबारी को झांसे में लेने के लिए आरोपियों ने अमेरिका की एक कंपनी का फर्जी मांग पत्र (लीड) दिखाया, जिस पर 200 मीट्रिक टन पास्ता की आपूर्ति का ऑर्डर दर्शाया गया था। इस पर विश्वास करते हुए पीड़ित ने 28 अगस्त 2024 को पंजीकरण शुल्क के रूप में 41,300 रुपये का भुगतान कर दिया। इसके बाद ठगी का सिलसिला आगे बढ़ा और आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर व्यापारिक चर्चा शुरू की। उन्होंने पैनांगो इम्पेक्स नामक विदेशी कंपनी के साथ जाली अनुबंध और खरीद आदेश भी तैयार करवा दिए। भुगतान की प्रक्रिया के नाम पर अभियुक्त अभिषेक सिंह ने पीड़ित से वर्ल्ड ट्रेड एश्योरेंस सर्टिफिकेट बनाने के लिए 1,85,000 रुपये अतिरिक्त जमा करवा लिए। कुल मिलाकर पीड़ित कंपनी से 2,07,800 रुपये एरा स्काई टेक्नोलॉजीज के बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए गए। ठगी का खुलासा तब हुआ जब भुगतान न मिलने पर पीड़ित ने आरोपियों के कानपुर स्थित कार्यालय का रुख किया। वहां पता चला कि मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह पहले ही धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में गिरफ्रतार हो चुका है और एजेंसी द्वारा दिए गए सभी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं। कानपुर कार्यालय जाने पर वहां मौजूद कर्मचारियों ने पीड़ित को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और न ही कंपनी के निदेशकों से मिलने दिया। स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई न किए जाने पर पीड़ित ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने अब निहाल सिंह राठौर, नेहा वाजपेई, रितेश शुक्ला, अभिषेक सिंह, अभिजीत वर्मा और शेखर शेखावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

मुकेश गुप्ता,
संपादक – ‘ऊधम सिंह नगर टाइम्स’
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