बीते वर्ष सहायक अध्यापक पद पर हुई थी नियुक्ति, जांच में हुआ खुलासा
रुद्रपुर। प्राथमिक शिक्षा में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का निवास प्रमाण पत्र बनवाकर सहायक अध्यापक की नौकरी करने वालों पर विभाग की गाज गिरनी शुरू हो गई है। बीते वर्ष सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त राजकीय प्राथमिक विद्यालय नई आबादी हरसान बाजपुर के शोभित सिंह को निलंबित कर दिया गया है। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध तेज हुई कार्रवाई से विभाग में खलबली मची हुई है।वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले में सहायक शिक्षकों के 309 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसमें बड़ी संख्या में उत्तरप्रदेश से डीएलएड किए लोगों ने आवेदन किया था। जिसमें 40 से अधिक लोगों को मेरिट और शपथ पत्र के आधार पर सहायक अध्यापक के पदों पर नियुक्त कर दिया गया। इसमें से एक शोभित सिंह की नियुक्ति जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नई आबादी हरसान बाजपुर में हुई। नियुक्ति के कुछ माह बाद ही विभाग के समक्ष शिकायत की गई कि शोभित सिंह ने फर्जी तरीके से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का स्थाई निवास प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस का प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल किया है। शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीईओ प्रारंभिक हरेंद्र कुमार मिश्र ने इसकी जांच उप शिक्षा अधिकारी बाजपुर को सौंपी। उप शिक्षा अधिकारी की जांच आख्या में पाया गया कि सहायक अध्यापक ने डीएलएड के लिए उत्तर प्रदेश और सहायक अध्यापक के लिए उत्तराखंड का स्थाई निवास प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस का प्रमाण पत्र बनवाया है। इस जांच आख्या के आधार पर डीईओ ने सोमवार को सहायक अध्यापक को निलंबित करते हुए उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय बाजपुर में संबद्ध कर दिया है।
आखिर किस आधार पर तहसीलों ने बनाए प्रमाण पत्र…
उत्तर प्रदेश से डीएलएड करने के लिए आवेदकों ने वहां का निवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र तो बनवाया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जैसे ही उत्तराखंड में भर्ती के लिए आवेदन हुए कि बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन कर दिए। मेरिट लिस्ट में आने के बाद धड़ाधड़ ऊधमसिंह नगर की तहसीलों से स्थाई निवास प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी किए गए। अब ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब उत्तर प्रदेश का स्थाई निवास है तो फिर कैसे तहसीलों से ये फर्जी कागजात जारी किए गए। अंदरखाने चल रही चर्चाओं की मानें तो तहसीलों में एक-एक प्रमाण पत्र के लिए बड़े पैमाने पर धनउगाही की गई है। यह ऊधम सिंह नगर में पहला मामला नहीं है, इसके पहले भी शिक्षा विभाग सहित कई विभागों में तहसीलों की कारस्तानी उजागर हो चुकी है।
40 अन्य शिक्षकों पर भी लटकी कार्रवाई की तलवार
जिले में दो प्रदेशों के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में पहली कार्रवाई तो हो चुकी है पर ऐसे अभी 40 लोगों को चिन्हित किया गया है। शिक्षा विभाग की तरफ से सभी ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर विभाग ने सभी को अपना पक्ष रखने के लिए जिला मुख्यालय तलब किया है। इस मामले में भी माना जा रहा है कि कई लोगों पर गाज गिरना संभव है। इससे नई नियुक्ति के अध्यापकों में खलबली मची हुई है।
डीईओ हरेंद्र मिश्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से स्थाई निवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने की शिकायत के आधार पर जांच में मामला सही पाया गया था। इसके आधार पर सहायक अध्यापक को निलंबित कर दिया गया है। अन्य ऐसे शिक्षकों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी की गई है।

मुकेश गुप्ता,
संपादक – ‘ऊधम सिंह नगर टाइम्स’
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